हनुमान चालीसा
लेखक: गोस्वामी तुलसीदास दोहाश्रीगुरु चरण सरोज रज निज मनु मुकुर सुधारि ।बरनऊ रघुवर विमल जसु जो दायकु फल चारि ।।बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौ पवन कुमार ।बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार ।। चौपाईजय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥ राम दूत अतुलित बल धामा ।अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥ … Read more